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महाभारत की एक साँझ

ICSE Class 10 Hindi • Ekanki Sanchay (Plays) • Chapter 5

mahabharat ki ek sanjh

एकांकी का सारांश (Summary):

'महाभारत की एक साँझ' श्री भारतभूषण अग्रवाल द्वारा रचित एक मनोवैज्ञानिक और पौराणिक (Mythological) एकांकी है। यह एकांकी महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की 'संध्या (शाम)' की घटना पर आधारित है। युद्ध के अंत में जब कौरव पक्ष का पूरी तरह विनाश हो जाता है तो दुर्योधन अपनी जान बचाने के लिए 'द्वैपायन सरोवर' (एक तालाब) में छिप जाता है। पाण्डव उसे ढूँढ़ निकालते हैं और उसे युद्ध के लिए ललकारते हैं। एकांकी में मरणासन्न (dying) दुर्योधन और युधिष्ठिर के बीच एक बहुत ही तीखा विचारों का टकराव (वाद-विवाद) दिखाया गया है, जहाँ दुर्योधन अपने जीवन की सभी गलतियों को सही ठहराने की कोशिश करता है।

1. एकांकीकार का परिचय (Author Introduction)

रचनाकार: भारतभूषण अग्रवाल (Bharatbhushan Agrawal)

भारतभूषण अग्रवाल आधुनिक हिंदी साहित्य के जाने-माने कवि, कथाकार और एकांकीकार हैं। उनकी रचनाओं में पौराणिक और ऐतिहासिक कथाओं को एक नए मनोवैज्ञानिक और आधुनिक दृष्टिकोण (Modern perspective) से देखा गया है। 'महाभारत की एक साँझ' में उन्होंने दुर्योधन के चरित्र का गहरा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है और अन्याय पर सत्य की विजय को भिन्न रूप में प्रस्तुत किया है।

2. एकांकी के मुख्य पात्र (Main Characters)

3. एकांकी की प्रमुख घटनाएँ (Key Events)

4. महत्वपूर्ण कथन (Important Quotes)

"मैंने युद्ध नहीं किया, मैंने तो केवल अपने उस सत्य की रक्षा की है जो तुम लोगों के अहंकार के कारण कुचला जा रहा था... लेकिन मुझे क्या मिला? केवल मेरी महत्त्वाकांक्षा ने यह महाविनाश रचा?"

= दुर्योधन का यह कथन उसके अहंकार और आत्म-तर्क (Self-justification) को दर्शाता है। वह अपनी ग़लती मानने को तैयार नहीं है। (यह कथन महत्वपूर्ण है)।

"तुमने सत्य के लिए नहीं, अपनी अंधी 'महत्त्वाकांक्षा' और 'कपट' के लिए युद्ध किया।"

= युधिष्ठिर का यह कथन दुर्योधन को दर्पण (सच्चाई) दिखाता है।

5. एकांकी का उद्देश्य (Theme)

mahabharat final duel

6. परीक्षा उपयोगी प्रश्न-उत्तर (Practice Zone)

BOARD EXAM QUESTIONS

प्रश्न 1: महाभारत का युद्ध कहाँ और कितने दिनों तक चला? दुर्योधन अपने प्राण बचाने के लिए कहाँ छिपा था?

उत्तर: महाभारत का भयंकर युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में अठारह (18) दिनों तक चला था जिसमें कौरवों की विशाल सेना मारी गई थी। जब युद्ध के अंत में अकेला दुर्योधन बचा तो वह अपनी जान बचाने के लिए 'द्वैपायन सरोवर' (एक जलाशय/तालाब) के जल के अंदर जाकर छिप गया था।


प्रश्न 2: दुर्योधन के अनुसार महाभारत युद्ध का असली कारण क्या था?

उत्तर: मरणासन्न दुर्योधन (जब वह घायल पड़ा था) ने युधिष्ठिर पर आरोप लगाते हुए महाभारत युद्ध के तीन मुख्य कारण बताए: (1) उसका मानना था कि पाण्डवों के पास अपनी कोई ज़मीन नहीं थी और वे 'महत्त्वाकांक्षा' के कारण इन्द्रप्रस्थ के बाद हस्तिनापुर हड़पना चाहते थे। (2) द्रोपदी द्वारा राजसूय यज्ञ में दुर्योधन को यह कहना कि 'अंधे का बेटा अंधा', जिससे दुर्योधन का भारी अपमान हुआ और उसके अंदर प्रतिशोध (Revenge) की ज्वाला भड़क उठी। (3) पाण्डवों द्वारा राज्य की सत्ता को बाँटने की ज़िद। दुर्योधन अपनी किसी भी गलती (जैसे लाक्षागृह षड्यंत्र, द्रोपदी चीरहरण या सत्ता का अहंकार) को युद्ध का कारण मानने से साफ़ इंकार करता है।


प्रश्न 3: एकांकी के शीर्षक 'महाभारत की एक साँझ' की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: एकांकी का शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त और सार्थक है। 'महाभारत की एक साँझ' का अर्थ है - महाभारत युद्ध के अठारहवें (अंतिम) दिन की वह 'शाम (संध्या)', जब पूरे कौरव वंश का विनाश हो चुका था और घायल दुर्योधन द्वैपायन सरोवर के पास पड़ा था। यह साँझ केवल उस दिन की साँझ नहीं थी, बल्कि दुर्योधन के 'जीवन' की साँझ, कौरव 'साम्राज्य' के पतन की साँझ और 'अहंकार' के अंत की साँझ थी। इसी संध्या में पूरे महाभारत के युद्ध के कारणों और परिणामों पर दुर्योधन और युधिष्ठिर के बीच एक अंतिम और बहुत मार्मिक बहस होती है। अतः शीर्षक बिल्कुल सटीक है।